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Thursday, July 9, 2020

कंकाल की पुकार





मुझे लौटा दो,
मेरी उस उम्र को
जिसमें थी,
सौ-सौ साल तक जीनें की तमन्ना।
मुझे लौटा दो,
मेरे वो तकदीर,
जिसमें न था अन्न-अभाव ।
मुझे लौटा दो,
मेरी वो हरियाली
जिसमें थीं,
रंग-विरंगी तितलियों की किलकरियाँ।
मुझे लौटा दो,
मेरी उन बहती झरनों को
जहाँ थी, हजारों मेढ़कों की ताल।
मुझे लौटा दो,
मेरी उन पग डंडियों को,
जिसमें थे,
अनगिनत रेंगने वालों के आर-पार।
मुझे लौटा दो,
मेरी उन बादलों को,
जिसमें थीं,
अनवरत् वर्षा करने की दम।
मुझे लौटा दो,
मेरी उन चीड़-साल वृक्षों को,
जिसमें था,
गगन को छुने की हौसला।
मुझे लौटा दो,
मेरे उन जंगलों को,
जहाँ था,
हजारों-हजार जीवों का बसेरा।
मुझे लौटा दो.................।

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