अपने को सर्वश्रेष्ठ
जीव जगत को अपना जागिर समझने वालों
आखिर
तुम्हारी कौन सी मूर्खता ने
इस मुकाम तक ला खड़ा किया है
जहाँ
तुम अपने को असहाय पाते हो
अस्पताल में न बेड-आक्सीजन
न शमशान घाट में
जगह नसीब हो रहा है।
कहाँ गई तुम्हारे हिकड़ी
कहाँ गई तुम्हारे -बड़े बड़े डिग्रियाँ
कहाँ गई तुम्हारे 21 वीं सदी का हुनर
सब के सब
कहाँ मर गये तुमलोग
कहाँ छिप गये सब।
हिम्मत है तो मेरा सामना करके दिखाओ
अरे भड़वे सब
चाँद पर पानी तलासने वाले
लाल ग्रह की जमीन हड़पने की मनसा वाले
आ जा जिगरा में दम है तो
मुझे रोक के देखा
कितनी अकल, कितनी अक्कड़
है तुझमें।
अरे भड़वे सब
किस सभ्य समाज के जीव हो तुम
सभी जीवों को
अपना भोजन
अपना निवाला
अपना गुलाम
समझने वाले आखिर तुम लाचार क्यों हो अब।
वाह रे
तेरे सभ्य समाज की सोच
बाकी जीव को मरते गये
और
तुम अपना वंश को
दिन-दुनी रात चौगुनी बढ़ाते गये
अब तुम्हीं बताओ
यह कहाँ का न्याय है
सभ्य समाज के नाम सबसे बड़ा कलंक तुम हो
एक तरफ पढ़ते गये आक्सीजन के बारे में
दूसरी तरफ काटते गये सारे प्लांट
अब
क्यों ढुँढ़ते फिर रहे हो
आक्सीजन सिलेन्डर के प्लांट।
अरे ना समझ
अनजाने में तुम मेरा बड़ा काम कर गये हो
धरती पर जो गड्ढा बनाये हो
उसमेंं तुम्हें सुलाने का काम मैं करने वाला हुँ।
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